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चाईबासा : फिजूल बह रही जीवन धारा, कंही बून्द बून्द को तरस रहे लोग तो कंही खुले आम बह रहा पानी

चाईबासा : फिजूल बह रही जीवन धारा, कंही बून्द बून्द को तरस रहे लोग तो कंही खुले आम बह रहा पानीचाईबासा : फिजूल बह रही जीवन धारा, कंही बून्द बून्द को तरस रहे लोग तो कंही खुले आम बह रहा पानी
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Chaibasa News-02 अप्रेल 2024: चाईबासा, पानी की बर्बादी को लेकर प्रशाशन और कई लोग नशीहत तो देते है लेकिन क्या उनपर अमल करते है। लगता है की “जल ही जीवन है” अब एक जुमला बनकर रह गया है। कियों की पानी की बर्बादी अब खुले आम हो रही है। न कोई बोलने वाला और न हीं कोई रोकने वाला। पानी की बर्बादी एक गंभीर समस्या बन गई है। एक तरफ, कुछ लोग पानी की कमी से जूझ रहे हैं, तो दूसरी तरफ, सार्वजनिक नलों से पानी बेकार बह रहा है।

ऐसा ही एक नज़ारा चाईबासा मधु बाजार स्थित हनुमान मंदिर के समीप सार्वजनिक रूप से लगे सरकारी नल से लगभग पुरे दिन ही पानी बर्बाद होता रहता है. इस बिच जिसे ज़रूरत हुई वो पानी भरकर ले गया लेकिन पानी लगातार बहता रहता है। यह केवल नगरपालिका या फिर प्रसाशन की ज़िम्मेदारी नहीं है। बल्कि हम सभी नागरिकों की भी कुछ ज़िम्मेदारियाँ है। जो हम अक्सर अपने रोज़ मर्रा के काम काज में व्यस्त होकर अपनी नागरिकता की ज़िम्मेदारियों से मुँह मोड़ लेते है।

चाईबासा : फिजूल बह रही जीवन धारा, कंही बून्द बून्द को तरस रहे लोग तो कंही खुले आम बह रहा पानी
चाईबासा : फिजूल बह रही जीवन धारा, कंही बून्द बून्द को तरस रहे लोग तो कंही खुले आम बह रहा पानी

इस नल से पानी बहने का कारण केवल एक टोटी का न होना है। नल के पाइप से लगातार पानी नाले में जाकर व्यर्थ हो रहा है। आस्चर्य की बात यह है की यह पानी बरसो से ऐसे ही बह रहा है हालाँकि कई बार इसे रोकने के प्रयास भी किए गए हैं। लेकिन मामला जस का तस हो जाता है. यही इस्थिति अब भी बानी हुई है लेकिन किसी की नज़र अबतक कैसे नहीं पड़ी।

यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि पानी एक अनमोल संसाधन है, और हमें इसे बचाने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए।

अंत में, यह कहना उचित होगा कि पानी की बर्बादी रोकने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा।

चाईबासा : फिजूल बह रही जीवन धारा, कंही बून्द बून्द को तरस रहे लोग तो कंही खुले आम बह रहा पानी
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